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शुक्रवार, 27 सितंबर 2013

प्रश्न ? उत्तर - भाग - १

प्रिय मित्रों , बात चाहे हो भक्ति और आध्यात्म की और चाहे पूजापाठ की  अक्सर कुछ ऐसे प्रश्न हमारे दिमाग में आते है जो कि अक्सर हमें भ्रमित करते हैं कि ऐसा क्यों है , ऐसा कैसे है , इसका क्या कारण हो सकता है, ऐसे तमाम प्रशन हमें कुछ न कुछ सोचने पर मजबूर कर देते है, मित्रों मैं करीब १६ व्रष की आयु से मन्दिरों और गुरु जनों से जुड़ा हुआ हूँ , जिनके सानिध्य में मुझे काफी कुछ सीखने को मिला , जिनसे सबसे पहले मैंने ये जाना कि ( विद्या बाटने से विद्या कम नहीं पड़ती बल्कि बढ़ती है ) तो इस विषय पर जो कुछ भी मैंने अर्जन किया है वो सब आपके समक्ष लाता रहूँगा .. . . . !

                       प्रश्न -- गंगाजी और इनका जल इतना पावन और पवित्र क्यों माना जाता है ?



उ० --  भारत की सबसे महत्त्वपूर्ण नदी गंगा, जो भारत और बांग्लादेश में मिलाकर २,५१० किमी की दूरी तय करती हुई उत्तरांचल में हिमालय से लेकर बंगाल की खाड़ी के सुंदरवन तक विशाल भू भाग को सींचती व पोषित करती है, देश की प्राकृतिक संपदा ही नहीं, जन जन की भावनात्मक आस्था का आधार भी है। भारत की अनेक धार्मिक अवधारणाओं में गंगा नदी को देवी के रूप में निरूपित किया गया है। बहुत से पवित्र तीर्थस्थल गंगा नदी के किनारे पर बसे हुये हैं जिनमें वाराणसी ( बनारस ) और हरिद्वार सबसे प्रमुख हैं। गंगा नदी को भारत की पवित्र नदियों में सबसे पवित्र माना गया है एवं यह मान्यता है कि गंगा जी में स्नान करने से मनुष्य के सारे पापों का नाश हो जाता है। मरने के बाद लोग गंगा जी में अपनी राख विसर्जित करना मोक्ष की प्राप्ति के लिये आवश्यक समझते हैं, यहाँ तक कि कुछ लोग गंगा के किनारे ही प्राण विसर्जन या अंतिम संस्कार की इच्छा भी रखते हैं। इसके घाटों पर लोग पूजा अर्चना करते हैं और ध्यान लगाते हैं। गंगाजल को पवित्र समझा जाता है तथा समस्त संस्कारों में उसका होना आवश्यक है। पंचामृत में भी गंगाजल को एकअमृत माना गया है। अनेकपर्वों और उत्सवों का गंगा जी से सीधा संबंध है। उदाहरण के लिए मकर संक्रांति, कुंभ और गंगा दशहरा के समय गंगा जी में नहाना या केवल दर्शन ही कर लेना बहुत महत्त्वपूर्ण माना जाता है। गंगाजी के तटों पर अनेक प्रसिद्ध मेलों का आयोजन किया जाता है और अनेक प्रसिद्ध मंदिर गंगा जी के तट पर ही बने हुए हैं। महाभारत के अनुसार मात्र प्रयाग में माघ मास में गंगा-यमुना के संगम पर तीन करोड़ दस हजार तीर्थों का संगम होता है।.. . . . .

                        ( एकबार जो प्राणी शरण तेरी आता , यम की त्रास मिटाकर परमगती पाता )

                                                      गंगा जी की आरती देखें



. . . . गंगा जी को देवताओं की नदी कहते हैं। इनके जल में कभी कीड़े नहीं पड़ते। इनका उद्गम स्थल ' गोमुख ' है, जिस कारण इनका जल पवित्र माना जाता है।

मित्रों ये जानकारी आपको कैसी लगी , अपनी टिप्पणी ज़रूर दें !

2 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस अभिव्यक्ति की चर्चा कल रविवार (29-06-2014) को ''अभिव्यक्ति आप की'' ''बातें मेरे मन की'' (चर्चा मंच 1659) पर भी होगी
    --
    आप ज़रूर इस चर्चा पे नज़र डालें
    सादर

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